समस्तीपुर लोकसभा :: क्या साँसद रामचन्द्र पासवान की नैया लगेगी पार या फिर फँसेगी बीच मजधार..?

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समस्तीपुर । समस्तीपुर लोकसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की सीट रही है. 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर कर्पूरी ठाकुर यहां से चुनाव जीते थे. वर्तमान में लोजपा पप्रमुख रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान यहां से सांसद हैं.
1998 में आरजेडी, 1999 में जेडीयू, 2004 में आरजेडी, 2009 में जेडीयू इस सीट से जीती. जेडीयू के महेश्वर हजारी 2009 में इस सीट से सांसद बने. 2014 के लोकसभा चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस के डॉ अशोक कुमार को 6872 मतों से हराया था। उसके बाद यह सीट एलजेपी के नाम हो गई और रामचंद्र पासवान सांसद चुने गए.

समस्तीपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा खंड हैं। इनके नाम कुशेश्वर स्थान, हायाघाट, कल्यानपुर, वारिसनगर, समस्तीपुर और रोसेरा हैं। साल 1952 से इंडियन नेशनल कांग्रेस के सत्य नारायण सिन्हा से लेकर 2014 में लोक जनशक्ति पार्टी के राम चन्द्र पासवान तक समस्तीपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र ने कई रजनैतिक रंग देखे हैं। अन्य पांच विधानसभा सीटों में से कुशेश्वर स्थान और हायाघाट दरभंगा डिस्ट्रिक्ट में आते हैं। बिहार के 38 जिलों में से एक समस्तीपुर जिला आबादी के नजर से भारत का 42वां सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला है। इस जिले में तमाम लघु उद्योग चलते हैं। समस्तीपुर में ही पूर्वी केन्द्रीय रेलवे का सब डिवीज़न भी है।

रामचन्द्र पासवान ने दिसम्‍बर 2018 तक लोकसभा में मात्र 3 प्रश्‍न पूछे। उसी तरह से डिबेट का राष्ट्रीय औसत 63.8 है। पासवान ने सदन में मात्र 3 चर्चाओं में हिस्‍सा लिया। इन्होने लोकसभा में अपनी उपस्थिति भरपूर दर्ज करायी है। उपस्थिति के तौर पर जहाँ राज्‍य का औसत 88 प्रतिशत है वहीँ दिसम्‍बर 2018 तक इनकी व्‍यक्तिगत उपस्थिति 80 प्रतिशत रही है। पर बीते पांच वर्षों में इन्होने कोई भी प्राइवेट मेम्बर बिल नहीं प्रस्तुत किया है। यहाँ के लोगों का आरोप है कि साँसद रामचन्द्र पासवान कभी क्षेत्र में नही आते हैं। यहाँ के लोगों का कहना है रामचन्द्र पासवान लोकसभा चुनाव जीत नहीं पाएंगे क्योंकि लोग उनकी क्षमता और कार्यप्रणाली को समझते हैं। यहाँ उन्होंने कोई काम नहीं किए हैं।

2014 के आम चुनाव के आंकड़ों पर नज़र डालें तो किसी भी पार्टी का वोट बैंक मजबूत नहीं कहा जा सकता है। 2014 के लोकसभा चुनावों में विजयी पार्टी लोजपा का वोट शेयर मात्र 31 प्रतिशत रहा, जबकि दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 30 प्रतिशत था। 2019 में लोजपा का वोट बैंक मजबूत हुआ या कमजोर पड़ा यह तो पासवान के जमीनी काम-काज पर निर्भर करेगा, वहीं कांग्रेस या अन्‍य पार्टी मजबूत प्रदर्शन कर पायेगी यह उनके प्रचार पर निर्भर करेगा। खैर 2019 के परिणाम आने पर ही पता चलेगा कि यहां के असली वोटर किसे चुनते हैं..!

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