पत्रकार के हितों के लिए विधानसभा के शून्यकाल में उठाएँगे आवाज : अमरनाथ गामी

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न्यूज़ ऑफ मिथिला डेस्क/दरभंगा । अपनी बेबाक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले दरभंगा जिले के हायाघाट से जदयू के विधायक व प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति के सभापति अमरनाथ गामी ने अपने फेसबुक वॉल पर पत्रकार के हित के संदर्भ में एक पोस्ट लिखी है। साथ ही इस पोस्ट के जरिए सिस्टम पर भी सवाल उठाए गए हैं।
कृपा कर बिना पूरा पढ़े इस पोस्ट पे टिपणी नही करें।

गामी ने लिखा है- कलमकार पत्रकार मीडिया के मित्र के सम्मान में नमस्कार प्रणाम करते हुये ये पोस्ट लिखने का सहास जुटा रहा हूँ।
आपके अदम्य सहास एवम कठिन संघर्ष लोकतंत्र को बचा कर रखा है। भूखे पेट सोते हो कलम का रफ्तार नही टूटने देते हो।
आज जिला स्तर पे कितने पत्रकार है जिसे प्रबंधन से तीस हजार से अधिक मासिक मिलता होगा। अगर मिलता भी होगा तो संख्या नगण्य होगा। कुछ तो ऐसे पत्रकार है जो बिना पराश्रमिक लिये शौकिया पत्रकारिता करते है। कुछ तो पत्रकार बनते हैं, सामाजिक प्रतिष्ठा के लिये। अब बताइये कभी पत्रकार को अपने मांग के लिये हड़ताल करते देखा है,नही देखा होगा। फिर इनका जीवन किस हिसाब से कटता होगा कल्पना करें। उनके बच्चे की पढ़ाई कोई फ्री तो है नही। स्वास्थ सेवा फ्री तो है नही। कोई मुफ्त खाद्यान मिलता नही होगा। सब दुख सहते है किसी से कुछ नही कहते है। अपना समस्या को खबर भी नही बना सकते हैं। ये है पत्रकार का जीवन।
आवाम कहता नेता चोर अधिकारी चोर,न्याय व्यवस्था चोर,जब पत्रकार को गलत बोलता है तो दुख होती है।आज 99.99 प्रतिशत पत्रकार ईमानदार है। उसी पे लोकतंत्र जिंदा है। वार्ड मेम्बर से सांसद विधायक सभी क्या करते कौन नही जानता,विधायक फण्ड सांसद फण्ड में भी कमीशन का मानक पक्का काम सड़क भवन में कम चापाकल सोलर में अधिक ऐसा आम चर्चा है तो क्या बात अक्षर सह झूठ है या सत्य। पंचायत स्तर के कार्य उसमे कमीशन का चर्चा है सही या गलत।मनरेगा योजना नल जल पक्की नाली गली योजना में आदि सरकार के लूट योजना चर्चित है।
कलमकार बहुत मुश्किल से साक्ष्य जुटा कर कुछ गरबरी को प्रमाण समेत छापते है अक्सर अखबारों में विभिन्न तरह के घोटाले की चर्चा जोरों से रहती है।शिक्षा व्यवस्था,स्वास्थ व्यवस्था में हो रहे अनियमितता को खबर बनाते है।निजी विद्यालय के लूट निजी नर्सिग होम की लूट को पर्दाफास करते है। मिलावट खोर व्यापारी और अधिकारी के मिलन को भी खबर में जगह देते हैं।

शराब बंदी फेल खुले आम प्रशासन के मिली भगत से नकली शराब का खेल हर चीज को तो खबर में जगह देते ही है। आम जनता चटकारा लेकर खबर को पढ़ते सुनते हैं।पढ़े अखबार को कूड़ादान में फेंक देते है समाचार सुन अनसुना कर देते हैं क्योंकि वो इस भ्रस्ट व्यवस्था को नियति मान चुके हैं। कुल मिलाकर पत्रकारिता मेरे नजर में ईमानदारी से अपना काम कर रही हैं।
ये तो थी छोटे चोरों की कहानी। अब 0.1 प्रतिशत जो पत्रकार है असल मे वो पत्रकार है ही नही वो मीडिया हाउस है जो शुद्ध रूप से व्यवसायी है। अपना व्यवसाय चलाने के चक्कर मे असली भ्रस्टाचार के कारखाना के खिलाफ न अखबार लिख सकता है न tv चैनल खबर चला सकता है। क्योंकि उसे अखबार एवं अपने चैनल को पैसा एवं पॉवर के साथ रहना है।

असली भृस्टाचार का कारखाना केंद्र एवम राज्य के सरकार एवं विपक्ष के मिली भगत से चलता है।
जो जब सत्ता में आयेगा अपने प्रतिष्ठा अनुसार जनता के डर से छुप कर लूट मचायेगा।

जितना गरीब जनता के लिये योजना बनता है अगर सही से गरीब तक योजना पहुंच जाता तो आज गरीबी दूर रहती।
लोकशाही में सबको भ्रस्ट व्यवस्था का हिस्सा बना कर इंगेज कर दिया गया है।मतलब सांसद विधायक अपने खेल में मस्त पंचायती राज के प्रतिनिधि से सीधा जनता त्रस्त।

अब चले अंत की ओर ये अवैतनिक अपंजीकृत पत्रकारों को केवल पैसा ही नही कम देते है जब मन होता है पैसा लाने का टारगेट भी दे देते हैं। मतलब विज्ञापन इतना का इस जिला को देना है।
अब अपना पत्रकारिता टैग बचाने के चक्कर मे उनका हुकुम के चक्कर मे हम जैसे हरामखोर के पास आते है विज्ञापन का आग्रह करते है।आप जो निजी विद्यालय निजी स्वास्थ केंद्र bdo साहब मुखिया जी सांसद विधायक का जो होली दिवाली 26 जनवरी 15 अगस्त,आदि अवसर पर जिन महानुभावो का विज्ञापन देखते है।वो क्या है सीधा मैनेज मेन्ट का हुकुम का पालन करना।
इतना ही नही tv चैनलों पर अखबारों में जो विज्ञापन देखते है वो क्या है।

पैसा के लिये ही तो विज्ञापन चलाया जाता है। जितने fmcg समान का विज्ञापन देखते है जितना देर देखते है उतना पेमेंट करना पड़ता है कंपनी को।बाबा रामदेव का प्रोडक्ट या अन्य प्रोडक्ट या सरकारी योजना का विज्ञापन जो देखते है।

सभी का पेमेंट सिस्टम है।अब बताइये जिससे कमाएंगे उसके विरुद्ध कैसे जायेंगे। जितना टॉप मोस्ट मीडिया घराना है सबके सब हजारो करोड़ का घोसित अघोषित मिल्कियत का मालिक बन गया है।
आज भी कलम कार पत्रकार कुछ भाग्य साली पत्रकार को छोड़ दे तो अधिक तर पेट के लिये संघर्ष कर रहा है।
प्रतिष्ठा लायक जीवन यापन करने लायक आमदनी उनकी भी होना चाहिए योग्यता अनुसार।
कृपा कर जितने भी ईमानदार जन प्रतिनिधि है बड़े सदन के या छोटे सदन के हम सभी का दायित्व है इनके लेखनी को बिना प्रभावित किये इनका हर सम्भव मदद करे। ये भी लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है इनका भी सम्मान का दायित्व हम सबका है।
आम जनता इस भ्रस्ट व्यवस्था का विरोध करोगे तो आपना जाती अपना पार्टी का विरोध हो जायेगा इसलिये लूटने दो।
लिखने दो पत्रकार को कितना लिखेगा गरबर व्यवस्था पर तुम न्यूज़ सुन हंसना खबर पढ़ हंसना।
मेरा पार्टी का नेता मेरा जाती का नेता चोर हो ही नही सकता है, अगर है भी तो कौन ईमानदार है सवाल खड़ा कर इस बीमारी पर परदा डाल देना।
जब नाकों दम हो जाओगे फिर खुद सड़क पे आओगे। अभी बर्दाश्त की सीमा नही टूटी है। देखते है कब तक बर्दास्त करते हो।
एक बार सब मिल आवाज दो सत्ता परिवर्तन नही चाहिये मुझे व्यवस्था परिवर्तन की बात करो। जिसकी बात में व्यवस्था परिवर्तन दिखे उसे देश की सत्ता दो। मेरे बातों से किसी भी पत्रकार मित्र या प्रासंगिक चर्चा वाले मित्र से बुरा लगे तो मुझे क्षमा करेंगे। क्योंकि भ्रस्ट व्यवस्था है हम भी उसके अंग है कहने में क्या आपत्ति की मैं भी ईमानदार नही हूँ। आप तो ईमानदार हो कैसे सब जानते समझते चुप हो। व्यवस्था परिवर्तन को एक गैर राजनीतिक जनजागरण की जरूरत है। इसमें पत्रकार मित्र अहम रोल अदा कर सकते है।

बता दें कि विधायक अमरनाथ गामी जितनी सक्रियता से सोशल साइट्स पर जनता के साथ जुड़े हुए हैं और बेबाक़ से अपनी बात को रखते हैं उतनी ही अपने विधानसभा क्षेत्र में भी कार्यों के लिये जाने जाते हैं। श्री गामी ने न्यूज़ ऑफ मिथिला के संपादक निशांत झा से टेलीफोनिक बातचीत में बताया कि वे विधानसभा में शून्यकाल के दौरान प्रश्न पूछकर पत्रकार के हितों की बात को गंभीरता से उठाएँगे।

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