दरभंगा रेलखंड की निर्माण इतिहास के पन्नों में दर्ज।

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दरभंगा । रेलवे के इतिहास में दरभंगा लाइन का जुड़ना एक रोमांचक घटना है। महज 65 दिनों में 55 मिल तक रेल लाइन बिछा कर 15 अप्रैल 1874 को पहला रेल इंजन दरभंगा पहुंचा था। रेल के आगमन से इस क्षेत्र के विकास में तेजी आई। जिस समय रेल का यहां आगमन हुआ, वह अकाल का समय था।

उसी परिप्रेक्ष्य में यहां रेल की शुरुआत भी हुई और उसके माध्यम से यहां सामान को पहुंचाया गया। रेल के आगमन के करीब एक साल बाद यहां से यात्री सेवा की शुरुआत की गई थी। लनामिविवि के गांधी सदन में गुरुवार को कृष्णा प्रसाद बैरोलिया मेमोरियल लेक्चर के तहत आजादी से पहले मिथिला के विकास में रेलवे के योगदान विषय पर व्याख्यान देते हुए समस्तीपुर डिवीजन के डीआरएम रवींद्र कुमार जैन ने यह बातें कही। दरभंगा तक रेल के आगमन पर प्रकाश डालते हुए डीआरएम ने बताया कि फरवरी 1874 में इंजीनियर एफएस स्टैंडन ने अपनी टीम के साथ काम किया। रेल की पटरी कोलकाता से आई, इंजन इंग्लैंड से, स्लीपर आगरा से। इस दौरान चार बड़ी नदियों के ऊपर पुल का निर्माण भी कराया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रिटायर्ड आइएएस गजानन मिश्रा ने की। कार्यक्रम में डॉ. रमण दत्त झा, कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय समेत विवि के कई अधिकारी व शिक्षक मौजूद रहे। संचालन संतोष कुमार ने किया।

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