दरभंगा एक ऐसा शहर,जहां पुलिस नहीं संभालती ट्रैफिक..? ऐसे होता है काम..

0

दरभंगा । दरभंगा शहर के दोनार चौक की यातायात व्यवस्था अक्सर एक आम नागरिक के जिम्मे होती है। वे रोजाना श्रमदान कर लोगों को जाम से मुक्ति दिलाते हैं। पुलिस वाले भी उनके इस प्रयास का लोहा मानते। ये हैं विनोद मंडल उर्फ दिलीप। पिछले 12 साल से ऐसा करते हैं। चौक के पास ही उनका घर है। उनसे प्रेरित होकर कई युवक भी सहयोग करने लगे हैं।

दरभंगा शहर निवासी 45 वर्षीय विनोद चार भाई हैं। एक पटना में रहकर रोजगार करते हैं। जबकि, दो भाई दोनार में ही चाय और पान की दुकान चलाते हैं। विनोद की इच्छा पुलिस में जाने की थी, लेकिन गरीबी के चलते बहुत पढ़ाई नहीं हो सकी। इस कारण उनकी हसरत पूरी नहीं हो सकी।

घर के पास दोनार चौक और कुछ दूर स्थित रेलवे गुमटी पर अक्सर जाम के कारण लोगों को होने वाली परेशानी ने उन्हें काफी उद्वेलित किया। तकरीबन 12 वर्ष पहले उन्होंने जाम हटाने की शुरुआत की। धीरे-धीरे यह सिलसिला बन गया। अब तो अक्सर जाम लगने पर पहुंच जाते हैं।

पुलिस की तरह लाठी रखना और मदद में बढ़-चढ़कर भाग लेना उसकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। अविवाहित होने के कारण दोनों भाइयों के पास रहते हैं। उनके काम में भी सहयोग करते हैं।

प्रेरित हो कई युवक करते मदद

दोनार चौक शहर के व्यस्ततम इलाके में से एक है। बेनीपुर और बिरौल अनुमंडल को जिला मुख्यालय से जोडऩे का एकमात्र रास्ता यही है। पास ही में रेलवे गुमटी और एक बड़ा कॉन्वेंट स्कूल है। गुमटी बंद होने और स्कूल में छुट्टी के समय भीषण जाम की स्थिति बनती है। लोग घंटों परेशान होते हैं।

हालांकि ट्रैफिक पुलिस की शिफ्ट में ड्यूटी लगती है, जो नाकाफी होती है। ऐसे में विनोद मददगार के रूप आते हैं। अब तो रेल गुमटी बंद होने व स्कूल में छुट्टी के समय मदद में कई युवक भी पहुंच जाते हैं।

विनोद कहते हैं, जाम हटाने के दौरान सख्त रवैया भी अपनाना पड़ता है। लेकिन, उससे किसी को कष्ट नहीं पहुंचता। लोग उनके प्रयास की सराहना करते हैं। ट्रैफिक पुलिस गौतम कुमार कहते हैं, विनोद की मदद से काम आसान हो जाता है। जाम न लगे इस बारे में लोगों को ध्यान देना चाहिए।

ट्रैफिक थाने के थानाध्यक्ष जयनंदन का कहना है कि विनोद से आम लोगों को प्रेरणा और सहयोग मिल रहा है। जरूरत है जागरूकता लाने की, ताकि कोई चौक-चौराहे पर गाड़ी न लगाए। न ही वाहन से यात्रियों को उतारे। ऐसा होने से जाम की समस्या कम होगी।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। )

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here