विद्यापति सेवा संस्थान ने कुलपति के आवासीय सचिवालय परिसर में किया पौधारोपण

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एक समय था जब बुजुर्गों के नाम पर पेड़-पौधे व बाग बगीचे लगाए जाते थे। लोग उनकी पुत्र के समान सुरक्षा करते थे। पौधे जब पेड़ हो जाते थे तो वह हमें अपने पूर्वजों की याद दिलाने के साथ मौसमी फल का आनंद और छाया देते थे। यह बातें कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शशि नाथ झा ने मंगलवार को विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में उनके आवासीय सचिवालय में वृक्षारोपण करते हुए कही। उन्होंने कहा कि वेद और पुराण में भी एक वृक्ष को 10 पुत्र के समान कहा गया है। शास्त्रों में निहित इस सिद्धांत को अंगीकार करते हुए पितृपक्ष के अवसर पर विद्यापति सेवा संस्थान द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय और अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि अब वह समय आ गया है कि अगर हम पर्यावरण बचाने के लिए पौधारोपण नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पेड़ हमें जीवनदायिनी हवा व छाया देते हैं। इसलिए हमें पेड़ लगाने व उनकी हिफाजत करने का संकल्प लेना चाहिए।
मौके पर विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा की हरियाली समाप्त होने से आज भीषण गर्मी व अनेक लाइलाज बीमारियां फैलने लगी है। इसे देखते हुए विद्यापति सेवा संस्थान ने यथासंभव वृक्षारोपण करने का संकल्प लेते हुए पूर्वजों के लगाए पेड़ को काटे जाने पर विराम लगाने के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत नए पेड़ लगाने व पुराने पेड़ को बचाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने बताया कि मंगलवार को कुलशेष रूप से स्वर्ण चंपा की विलुप्त हो रही प्रजाति का पौधारोपण किया गया ताकि पर्यावरण की खुशहाली के साथ विलुप्त हो रहे पौधों की खुशबू वातावरण में बिखेरी जा सके। मौके पर संस्थान के शोभा यात्रा प्रभारी विनोद कुमार झा एवं मीडिया प्रभारी प्रो चंद्रशेखर झा बूढा भाई आदि भी मौजूद थे।

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