नेपाल के राजदूत से मिला संघर्ष समिति का प्रतिनिधि मंडल

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न्यूज़ ऑफ मिथिला डेस्क. अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधि मंडल ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नेपाल के राजदूत डा० शंकर प्रसाद शर्मा से मुलाकात की. इस मुलाकात में समिति की ओर से बीते सप्ताह सौंपे ग्रे ज्ञापन में शामिल मुद्दों के साथ ही मिथिला में बाढ की विभिषिका के कारण एवं इसके निदान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार किया. मौके पर राजदूत डा० शंकर प्रसाद शर्मा ने बताया कि समिति की ओर से बीते सप्ताह सौंपे गए ज्ञापन को आगे की कार्यवाही के लिए नेपाल सरकार को भेज दिया गया है. उन्होंने संघर्ष समिति के मांगों को गम्भीरता से लेते हुये कहा कि नागरिकता कानून से मैथिलों के अधिकार हनन, नेपाल के कारण मिथिला में बाढ की समस्या, मिथिला के सभ्यता – संस्कृति और मैथिली भाषा पर काम करने की जरूरत है. डा० शर्मा ने कहा कि उपरोक्त समस्याओं का निदान कर मिथिला में सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित करने के लिये काम करूँगा.

संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और विदेश मंत्री, भारत सरकार को आगाह है किया है कि उपरोक्त समस्याओं का निदान यदि जल्द नहीं किया गया तो मिथिला के दोनों तरफ अशांति का वातावरण फैलने का डर है. प्रतिनिधि मण्डल में संघर्ष समिति के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक प्रो० अमरेन्द्र कुमार झा, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी ईंजीनीयर शिशिर कुमार झा, भूतपूर्व दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विनोद राज झा, डा० अरविंद दास, सजन कुमार, दिल्ली प्रदेश प्रवक्ता मिहिर कुमार शामिल थे.

मिथिला चौक, नई दिल्ली:- पिछले सप्ताह के नाम से एक ज्ञापन सौंपा गया.प्रतिनिधिमंडल में अंतर्राष्ट्रीय संयोजक प्रो० अमरेन्द्र कुमार झा, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी ईंजीनीयर शिशिर कुमार झा, दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष हीरालाल प्रधान, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डा० अरविंद दास, सजन झा, अवध पांडे थे.

ज्ञापन में कहा गया है कि नेपाल राजनीति में नागरिकता कानून मिथिला और मैथिल विरोध केन्द्रित है, मैथिल को नागरिक अधिकार देना नेपाल सरकार का कर्तव्य है.मिथिला के लोगों का भारत और नेपाल में दोनों तरफ सुगौली संधि (1816-2016) के 200 साल के बाद नेपाल और भारत सरकार को कानून के मुताबिक अखंड मिथिला का निर्माण करना चाहिये.क्योंकि 200 वर्ष के इस संधि की समय सीमा समाप्ति हो चुकी है. हम स्वतंत्र राष्ट्र हैं. फिर भी 31 जुलाई 1950 को दोनों देशों के बीच शांति और दोस्ती पर समझौता हुआ. बता दें कि भारत और नेपाल की दोस्ती बहुत हीं खास है. इसका मुख्य कारण है कि दोनों तरफ ,एक क्षेत्र सनातनी मिथिला,मैथिलों की एक भाषा मैथिली, समान सभ्यता एवं संस्कृति, आपसी स्नेह एवं सहयोग और खुले सीमा में बेटी- रोटी का महत्वपूर्ण सम्बन्ध है. अभी चल रही नागरिकता कानून के विवाद में जिस तरह मैथिलों को सभी अधिकार से वंचित किया जा रहा है, इससे मैथिलों में आक्रोश है. अभी नेपाली नेताओं द्वारा मिथिला विरोधी बयान से लग रहा है कि डा० लक्ष्मण झा द्वारा 1951-53 में ” पाया तोङो आंदोलन ” सही था और उस आंदोलन को फिर से जीवंत करने की जरूरत है.

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