गर्व:: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के हाथों सम्मानित हुई लोक गायिका पूनम मिश्रा।

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मिथिला की प्रतिभा देश ही नहीं, पूरे विश्व में अपना परचम लहरा रही है। परचम लहरा रही प्रतिभाओं में एक और नाम तब जुड़ गया जब मिथिला की बेटी पूनम मिश्रा को 25 दिसम्बर को नई दिल्ली में अटल भारत फाउंडेशन के कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ‘अटल मिथिला सम्मान से सम्मानित किया।

मौके पर मौजूद विशिष्ट अतिथियों में पूर्व राज्यसभा सांसद प्रभात झा , दरभंगा सांसद गोपाल जी ठाकुर के अलावा मशहूर गायक उदित नारायण जैसी हस्तियों ने पूनम मिश्रा के गायिकी की खुलकर तारीफ की। दरअसल पूनम मिश्रा के पिता संगीतज्ञ थे। हारमोनियम बजाते थे। उन्हीं की उंगली थामें पूनम 6 वर्ष की उम्र में ही मंच की राह पकड़ ली।

मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड क्षेत्र के मनपौर गाँव में जन्में पूनम मिश्रा प्रख्यात लोक गायिका के रूप में सम्पूर्ण देश भर में जानी जाती है।

पूनम मिश्रा के स्वर में लगभग 70 से अधिक एल्बम बाजार में आ चुका है, जिसमें सबसे सुपरहिट एल्बम “मनमोहन दूल्हा” रहा। जहाँ तक हिट एल्बम की बात रही तो भगवती वंदना, दुलरुआ बौवा, सोहर-समदाउन, दुर्गा महिमा, दूल्हा-दुल्हिन इत्यादि है।
सोशल मीडिया पर भी काफ़ी लोकप्रिय पूनम मिश्रा के गानों को लाखों-करोड़ों की संख्या में लोग सुनते और उनके एलबम को देखते हैं।
युट्यूब पर पूनम मिश्रा के स्वर में “जहिये स गेलखिन सजना”, “विनती सुनियौ हे महारानी”, “बाबा रचि-रचि लिखबै यौ ,“पिया परदेश गेलै” , “राजा जनक जी के एक बेटी सीता जैसे कई मैथिली गीतों को श्रोताओं ने हाथोंहाथ लिया।
पूनम मिश्रा ने 4 वर्ष की उम्र में ही संगीत सीखना आरंभ कर दिया था। एक बेहतरीन गायिका के रूप में सम्पूर्ण देश भर में मैथिली लोक गायिका के रूप में चर्चित हैं।

सम्मान मिलने से उत्साहित पूनम मिश्रा ने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि अटल भारत फाउंडेशन द्वारा मुझे इस सम्मान के लिए चयन किया गया।और यह सम्मान सम्पूर्ण मिथिला का सम्मान है।

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