प्राथमिक विद्यालय में फिर से पढ़ाई जाएगी मैथिली:विधान परिषद् में कांग्रेस के प्रेमचंद मिश्रा ने की थी मांग; CM ने दी सहमति।

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बिहार के प्राथमिक विद्यालय में मैथिली की पढ़ाई फिर से शुरू होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पर अपनी सहमति दे दी है। बिहार विधान परिषद् में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद मिश्रा ने सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलते हुए कहा था कि मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के बावजूद उसकी पढ़ाई प्राथमिक विद्यालयों में बंद करा दी गई है। इसकी फिर से पढ़ाई पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजी हो गए हैं।

प्रेमचंद मिश्रा ने पत्रकारों को बताया कि पहले बिहार के स्कूलों में मैथिली की पढ़ाई होती थी लेकिन पिछले दो दशक से सरकार ने इसे बंद करा दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण था। इस पर हमने संशोधन दिया था। मुख्यमंत्री ने सदन के पटल पर जिस तरह से आश्वासन दिया है उसके बाद मुझे लगा है कि सरकार मैथिली की पढ़ाई स्कूलों में कराएगी। इस आश्वासन के बाद मैंने संशोधन को वापस लिया है।

प्रेमचंद मिश्रा विधान परिषद् में सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर बोल रहे थे और संशोधन की मांग कर रहे थे। इसी संदर्भ में उन्होंने मैथिली भाषा का सवाल उठाया था कि जिस भाषा को आठवीं अनुसूची में जगह मिली हुई है उसकी पढ़ाई बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में बंद क्यों करा दी गई है? भोजपुरी को भी अष्टम सूची में शामिल किया जाए। प्रेमचंद मिश्रा ने सदन में कहा था कि हमसे अच्छी मैथिली मुख्यमंत्री जी बोलते हैं, अशोक चौधरी भी अच्छी मैथिली बोलते हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बिहार में हर सेक्टर में काम हो रहे हैं और उनके सकारात्मक नतीजे अब सामने भी आ रहे हैं। हम आत्मनिर्भर बिहार के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। CM ने विधायकों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाएं। इसके लिए वे सरकार को पत्र भी भेज सकते हैं। उसके ऊपर कार्रवाई होगी। CM ने कोरोना को लेकर तमाम मापदंडों का पालन करने की अपील की। कहा कि किसी सूरत में किसी स्तर पर कोई असावधानी नहीं होनी चाहिए।

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