मिथिला मखाना के नाम से जीआई टैगिंग होने का रास्ता साफ,केन्द्रीय मंत्री ने सांसद को दी लिखित जानकारी।

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मिथिला का ही रहेगा मखाना
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मिथिला मखाना के नाम से जीआई टैगिंग होने का रास्ता साफ
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केन्द्रीय मंत्री ने सांसद को दी लिखित जानकारी
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विद्यापति सेवा संस्थान ने जताई थी कड़ी आपत्ति
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मिथिला के मखाना की जीआई टैगिंग मिथिला मखाना के नाम से ही होने का रास्ता अब साफ हो गया है। दरभंगा के सांसद डा गोपालजी ठाकुर द्वारा एक दिसंबर को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उठाए गए प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि भारत सरकार के भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री कार्यालय, चेन्नई द्वारा बिहार मखाना को मिथिला मखाना के रूप में जीआई टैग देने हेतु भौगोलिक संकेतक आवेदन को मंजूर कर लिया गया है। केंद्रीय मंत्री ने इस संदर्भ में बौद्धिक संपदा कार्यालय, चेन्नई द्वारा जारी पत्र की प्रति भी सांसद को उपलब्ध कराई है। इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए दरभंगा के सांसद डा गोपाल जी ठाकुर ने इसे सजग मिथिला वासी की अभूतपूर्व जीत बताया है। कृत कार्यवाही पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव के डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने शनिवार को कहा कि मिथिला के मखान की जीआई टैगिंग मिथिला मखाना के नाम से होने से मिथिला की आठ करोड़ जनता न सिर्फ उचित न्याय पाने में एक बार फिर कामयाब हुई है, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान के रूप में विख्यात मखान को कारोबारी जगत में आधिकारिक सम्मान भी हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि मिथिला देश में मखान का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है। लिहाजा, इसकी ब्रांडिग निश्चित रूप से मिथिला के मखान के रूप में होनी चाहिए थी। अब मिथिला के मखान की जीआई टैगिंग मिथिला मखाना के नाम से होने से मिथिला में मखान की खेती और मखाना उद्योग को युद्ध स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। इससे होने वाली आय को अब न सिर्फ मिथिला क्षेत्र के विकास में लगाया जा सकेगा बल्कि, इससे मिथिला में रोजगार सृजन की संभावना भी मजबूत हो सकेगी। मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष कमलाकांत ने सरकार के फैसला का स्वागत करते कहा कि इससे मिथिला के मखाना उत्पादकों को लाभ मिलने के साथ ही मिथिला के विकास को गति मिलेगी। एमएलएसएम कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य व प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. विद्यानाथ झा ने कहा कि मखाना मिथिलांचल में पाए जाने वाले दुर्लभ वनस्पतियों में से एक है। भारत में मखाना उत्पादन का 75 प्रतिशत भाग बिहार व उसमें से लगभग 50 प्रतिशत भाग मिथिला उत्पादन का केंद्र है। लेकिन, उचित संरक्षण के अभाव में इसका विकास नहीं हो रहा है। हालांकि, इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए दरभंगा में अनुसंधान केंद्र भी स्थापित है। लेकिन, फंडिग के अभाव में इसका सही फायदा मखान उत्पादकों को नहीं मिल पा रहा है। अब जीआई टैग के तहत इसकी ब्रांडिग मिथिला मखान के नाम से होने से इस क्षेत्र में मखान उत्पादन को काफी बढ़ावा मिल सकेगा। प्रवीण कुमार झा ने कहा कि मखाना का मिथिला के नाम से जीआई टैगिंग होने से मखाना विपणन की बेहतर सुविधा मिथिला के मखाना उत्पादकों को मिल सकेगी। प्रो अनिल कुमार झा ने कहा कि मिथिला के मखाना को दुनिया के 100 में से 90 देशों के लोग बड़े चाव से खाते हैं। यही कारण है कि दुनिया के मखाना उत्पादन में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 85 से 90 फीसदी है। मखाना की ब्रांडिग मिथिला मखाना नाम से होने से मखाना उद्योग में जान आना निश्चित है। डा बुचरू पासवान ने कहा कि मिथिला के नाम से इसकी ब्रांडिग होने से मिथिला के मखाना का समुचित संरक्षण व संवर्धन हो सकेगा।
मिथिला के मखाना की जीआई टैगिंग मिथिला मखाना के नाम से होने पर डॉ महेंद्र नारायण राम, हरिश्चंद्र हरित, डॉ गणेश कांत झा, विनोद कुमार झा, प्रो विजयकांत झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढा भाई, डॉ उदय कांत मिश्र, डॉ महानंद ठाकुर, विद्यापति टाइम्स के विनोद कुमार, दुर्गानंद झा, आशीष चौधरी, पुरूषोत्तम वत्स आदि ने भी हर्ष जताया है।

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