डब्ल्यूआइटी के स्वरूप को बदलने की कोशिश के खिलाफ विद्वत समाज एवं आमजनमानस में रोष।

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दरभंगा: मिथिला विश्वविद्यालय अन्तर्गत Women’s institute of technology (W.I.T) स्थित है ! इसकी स्थापना वर्ष 2005 ई०में तत्कालीन विद्वान कुलपति डा०राजमणि प्रसाद सिन्हा के अथक प्रयास से शुरू हुआ जो तत्कालीन समय में भारतवर्ष का दूसरा महिला प्रौद्योगिकी संस्थान था एवं वर्तमान में भारतवर्ष में छठॉं या सातवॉं महिला प्रौद्योगिकी संस्थान है ! बता दें कि यह बिहार का एकमात्र संस्थान है !

विदित हो कि इस संस्थान का उद्धाटन स्वयं तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ०ए०पी०जे०अब्दुल कलाम ,तत्कालीन राज्यपाल सरदार बूटा सिंह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कर कमलों से हुआ था। इस उद्धाटन कार्यक्रम में अनेकों गणमान्य मंत्रीगण, गणमान्य सैकडो शिक्षाविद् उपस्थित हुए थे। इस संस्थान के प्रथम निदेशक पद्मश्री वैज्ञानिक स्व०मानस बिहारी वर्मा बनाये गये थे !

स्थानीय लोगों व छात्र संघ द्वारा इस महिला प्रौद्योगिकी संस्थान के स्वरूप को बदलने के खिलाफ सोशल मीडिया पर कुलपति व कुलसचिव के विरुद्ध लोग जमकर लिख कर रहे हैं।

भाजपा नेता आदित्य नारायण “मन्ना ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि इस संस्थान से अभी तक हज़ारों बालिकाओं ने बीटेक की डिग्री प्राप्त कर देश विदेश में सेवा देकर मिथिला का नाम रौशन कर रही है। आज इस संस्थान को यहॉं के कुलपति एवं कुलसचिव महोदय दुर्भावनाग्रस्त होकर यहॉं के नियम कानून को बदलकर को-एजुकेशन का प्रावधान करने में विगत एक दो दिनों से लगे हुए हैं एवं आमजनमानस इसको लेकर उद्वेलित है और यह कुकृत्य देश के प्रधानमंत्री एवं बिहार के मुख्यमंत्री का सपना नारी सशक्तिकरण एवं बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ पर कुठाराघात है।

विदित हो कि इस धटना से मर्माहत होकर इस संस्थान के नींवकर्ता तत्कालीन कुलपति डा० राजमणि प्रसाद सिन्हाजी ने डब्ल्यूआईटी के सलाहकार परिषद से अपने इस्तीफ़े की पेशकश की है।

सोशल मीडिया के माध्यम से मिथिला के विद्वत समाज एवं आमजनमानस ने अपील की है कि इस मामले के संज्ञानार्थ आमजनमानस हितार्थ इसके नियम को यथावत रखने हेतु आवश्यक कारवाई करने की कृपा की जाय।

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