इस बार दिल्ली केजरीवाल के इरादों पर झाड़ू फेरेगी : संजय झा। न्यूज़ ऑफ मिथिला

नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा चुनाव की लड़ाई अब अपने निर्णायक चरण में है और इसीलिए इस ठंड में भी गर्मी बढ़ गयी है। जदयू दिल्ली प्रदेश के प्रभारी व बिहार सरकार के जलसंसाधन मंत्री संजय झा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा व्यंग्य किया है। श्री झा ने सोशल साइट्स पर अपने ब्लॉग के माध्यम से कहा कि इस बार दिल्ली केजरीवाल के इरादों पर झाड़ू फेरेगी। श्री झा ने कहा कि जनता दल यूनाइटेड गठबंधन धर्म का पालन करते हुए भाजपा और लोजपा के साथ मिलकर इस चुनाव में जनता-जनार्दन का आशीष और मत पाने मैदान में उतरा है।

दिल्ली के 1.46 करोड़ मतदताओं में 33.5 फीसदी पूर्वांचली हैं और यह कहने में कोई संकोच नहीं कि अरविंद केजरीवाल ने इस समुदाय को बहुत बुरी तरह से ठगा है। दिल्ली की असली लड़ाई उन 30 विधानसभाओं में फैली इस जनसंख्या के ही आशीर्वाद से जीती जाएगी। 2015 में अरविंद केजरीवाल ने भोले-भाले पुरबियों को लुभाने के लिए बड़ी संख्या में इस समुदाय के लोगों को टिकट बांटे और जनता ने उनमें से 13 को विधानसभा भी पहुंचाया, लेकिन उसका नतीजा क्या? ढाक के तीन पात।

आज भी इन इलाकों में आधारभूत सुविधाओं की घनघोर कमी है। टूटे-फूटे रास्ते, बहता सीवर, कूड़े का ढेर ही संगम विहार, बुड़ारी, किरारी जैसे क्षेत्रों का अभिशाप है। हमारे गठबंधन साझीदार भाजपा ने अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत किया, इसके लिए उनका धन्यवाद। हमारी पार्टी का मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य इस चुनाव में एक सकारात्मक एजेंडा प्राप्त करना है, ताकि हम पूर्वांचल के उन लोगों की सेवा कर सकें, जो दिल्ली की रीढ़ हैं, जिनकी वजह से दिल्ली का स्वर्णाभ दमकता चेहरा है।

पार्टी ने मुझे दिल्ली विधानसभा चुनाव की कमान देकर यह साफ कर दिया है कि वह अपने इरादे को लेकर कितनी गंभीर है। इसके लिए जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार जी का धन्यवाद। कैसी विडंबना है कि जिन केजरीवाल ने 2015 में जनता से किए वादों पर झाड़ू फेर दी, आज गारंटी कार्ड बांटते फिर रहे हैं, जिस राजनीति में स्वच्छता और शुचिता लाने का उनकी पार्टी ने डंका पीटा, वही केजरीवाल आज दागियों से सर्वाधिक घिरे हैं, उनके विधायकों पर पत्नी को पीटने, बलात्कार से लेकर आर्थिक घोटालों तक के आरोप हैं, दिल्ली विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है और इसके अधिकांश इलाकों में जो पीने का पानी है, वह इस्तेमाल करने के लायक नहीं है।

बिहार में नीतीश कुमार जी ने विकास की राह दिखायी है, प्रगति का एक मॉडल पेश किया है। इस भीषण ठंड में जब सभी लोग रजाइयों में दुबके थे, तो 67 वर्षीय योद्धा बिहार के हरेक ज़िले में घूमकर विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे थे, जहां जिलाधिकारी से लेकर पार्षद स्तर के नेता तक मौजूद थे, उनसे विकास कार्यों पर राय और प्रगति-रिपोर्ट मांगी जा रही थी। जब खुद मुख्यमंत्री इतने संलग्न होंगे, तो विकास की गति कितनी होगी, यह सोच सकते हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य के मसले पर केजरीवाल ढोल भले पीट लें, पूरे पेज के विज्ञापन भले दे लें, पर सच्चाई हम सभी जानते हैं। शिक्षा का हाल यह है कि दसवीं बोर्ड में खराब रिज़ल्ट के मामले में 13 वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया है, 12वीं बोर्ड में बैठने वाले बच्चों की संख्या 5 साल में 50 हज़ार तक कम हो गयी है, नाकाम हुए बच्चों को स्कूली सिस्टम से ही निकाल दिया गया है। दो-तिहाई बच्चे मजबूरी में कला और वाणिज्य पढ़ रहे हैं, क्योंकि आधे से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं और सरकारी स्कूलों में डेढ़ लाख से अधिक नामांकन घट गए हैं। दो स्कूलों में स्वीमिंग पूल खोलकर और उनकी तस्वीरें यत्र-तत्र-सर्वत्र चिपकाकर केजरीवाल शायद वही कर रहे हैं कि कंकाल के ऊपर जड़ाऊ मखमल की पोशाक पहना दी है और उसकी प्रदर्शनी कर रहे हैं।

बिहार ने अभी पर्यावरण के मामले में भी राह दिखायी है, हमने पिछले 15 वर्षो में बिहार की सूरत बदली है, जहां पहले लोग बिहारी शब्द को अपमान के लिए इस्तेमाल करते थे, वह आज गौरव और सम्मान से लिया जाता है। हम दिल्ली में भी इस प्रयोग को दुहराएंगे और हमें यकीन है कि जनता इसके लिए हमें आशीर्वाद देगी।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *