दिल्ली अनाज मंडी में आग लगने से बिहार के समस्तीपुर के हरपुर गांव का हुआ सबसे अधिक नुकसान। न्यूज़ ऑफ मिथिला

दिल्ली,न्यूज़ ऑफ मिथिला : दिल्ली के अनाज मंडी में लगी भीषण आग में करीब 43 जिंदगियां जलकर खाक हो गईं। रविवार की सुबह करीब 4.30 बजे लगी आग में 43 लोगों के मरने से राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सन्नाटा पसरा हुआ है। दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी फैक्ट्री में लगी आग में करीब 56 लोगों को बचाया गया। इस हादसे में सबसे ज्यादा प्रभावितों संख्या बिहार के समस्तीपुर के एक गांव की है। दिल्ली अनाज मंडी आग हादसे में प्रभावितों में से समस्तीपुर के हरपुर गांव के 30 लोग शामिल हैं। हालांकि, यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि इन प्रभावितों में कितने लोग घायल हैं और कितने लोगों की मौत हुई है।

अधिकारियों की मानें तो दिल्ली के अनाज मंडी फैक्ट्री में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी है। संकरी गलियां होने की वजह से बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही थीं। इतना ही नहीं, फैक्ट्री का गेट अंदर से बंद था। एक ही मुख्यद्वार होने और खिड़कियां भी बेहद कम होने की वजह से नुकसान ज्यादा हो गया। हालांकि, एनडीआरएफ की टीमें 56 लोगों को बचाने में सफल रही।

इस बीच, बिजली वितरण कंपनी बीवाईपीएल ने दावा किया कि इमारत के भूतल पर लगे मीटर सुरक्षित हैं, जिससे प्रतीत होता है कि आग किसी अन्य कारण की वजह से लगी। वहीं दिल्ली पुलिस ने फैक्ट्री के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने बताया कि फैक्ट्री मालिक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैरइरादन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली सरकार ने आग लगने की घटना में मारे गए लोगों को 10 . 10 लाख रुपये और झुलसे लोगों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया।

घटनास्थल पर हृदय विदारक दृश्य था। फैक्ट्री में काम कर रहे लोगों के रिश्तेदार और स्थानीय लोग घटनास्थल की ओर भाग रहे थे। आग की चपेट में आए लोगों के परेशान परिजन विभिन्न अस्पतालों में अपने संबंधियों को खोज रहे थे। दमकल अधिकारियों ने बताया कि इलाके के संकरा होने के कारण बचाव कार्य को अंजाम देने में दिक्कत आ रही है। जब आग लगी तो कई मजदूर गहरी नींद में थे। इमारत में हवा आने-जाने की उचित व्यवस्था नहीं थी इसलिए कई लोगों की जान दम घुटने से चली गई। सभी झुलसे हुए लोगों और मृतकों को आरएमएल अस्पताल, एलएनजेपी और हिंदू राव अस्पताल ले जाया गया है, जहां लोग अपने रिश्तेदारों को ढूंढने में लगे हैं।

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