मिथिला में आए सबसे बड़ा जलसंकट,युवाओं ने उठाया बीड़ा, चला रहे “पोखैर बचाउ” अभियान

न्यूज़ ऑफ मिथिला । मिथिला का मौजूदा जल संकट किसी सडेन जियोग्राफिकल चेंज की वजह से है शायद (वैसे पुष्टि के लिए सरकार को रिसर्च करवानी चाहिए)। सबसे पहले यह बेगूसराय से शुरू हुआ, फिर समस्तीपुर, फिर दरभंगा और आसपास मुज़फ्फरपुर-सीतामढ़ी-मधुबनी के कुछ इलाकों में। एकतरह से देखिए तो ये गंगा के उत्तर क्रमानुगत रूप से फैल रहा है। अगला नम्बर शायद मधुबनी-झंझारपुर-सुपौल-सहरसा-मधेपुरा-पूर्णिया आदि का है। इससे पहले की प्रभाव वहाँ ज्यादा बढ़े, जरूरत है की जल संरक्षण की व्यवस्था हो। अभी मधुबनी-दरभंगा जिलों के कुछ हिस्सों में बारिस की खबर आ रही है, जरूरत है वर्षा जल संरक्षण से भूजलस्तर बढाने का। मुझे याद है की पहले बारिस के समय तालाब के आसपास खेतों में नालियाँ बनाकर वर्षाजल को तालाब में पहुंचाया जाता था। अब अधिकांश गांवों में संरक्षण के अभाव में तालाब से जुड़ी नालियाँ भर चूकी है। ग्राम-पंचायतों को इसके संदर्भ में विशेष ध्यान देना चाहिए। नहीं तो बीडीओ साहब अपने स्तर पर प्रयास करें और प्रखंड स्तर पर टीम बनाकर-मजदूर लगाकर सभी तालाबों में वर्षा-जल संरक्षित करने वाले नालियों को पुनर्जीवित करें। मिथिला क्षेत्र के युवाओं ने सोशल साइट्स पर पोखैर बचाउ अभियान छेड़ा है और तालाब के संरक्षण का बीड़ा उठाया है।

पग-पग पोखैर मुदा सुखायल

– आदित्य मोहन

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