72वें वर्ष के स्वतंत्र भारत में मिथिला को क्या मिला..! Mithila’s no. 1 web news portal

न्यूज डेस्क / सोशल मीडिया । मतदान को लोकतंत्र का
आम जनता अब यह मानने से तनिक भी संकोच नही करते कि चुनाव आते है आते रहेंगे और आएंगे..लेकिन हमारा कर्तव्य है अपने निजी जिंदगी की व्यस्तता , निजी स्वार्थ और निजता ही सर्वमान्य । आपने देखा होगा कि पिछले दशक में वोट की प्रतिशतता कम हुई है । इसको यह भी मान सकते है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक पद्धति वाले देश मे आमलोगों का चुनाव के प्रति नजरिया बदल गया है । क्योंकि उन्होंने यह मान लिया है कि चुनाव का मतलब धोखा , झूठ-फरेब होता है। 

यह बहुत ही चिंता योग्य बात है कि 130 करोड़ देशवासी वाले राष्ट्र आज नेताओं से भयभीत है । इसके जिम्मेदार हमारे पिछले दशकों के जनप्रतिनिधि है । जिन्होंने जनता के सेवा का शपथ खाकर उनके साथ धोखा देने काम किया है ।
घोटालों से सजी नेताओं की दुकान पर आज आमजन जाने से कतराते है ।  पिछले घोटाले के मध्यनजर “राफेल डील” भी बहुत सुर्खियां बटोरी है , लेकिन घोटाले की उपज वर्तमान विपक्ष उसे मजबूती से जनता के सामने रखने में नाकाम रही । हालाँकि जब तक सरकार में बने है तब तक उस घोटालों पर चर्चा नही हो पाएगी क्योंकि भारत सरकार के तामाम एजेंसी को निजी एजेंसी बना चुकी है वर्तमान सरकार । जिस प्रकार दुरुपयोग किया गया है इस पर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख आ चुका है । हम जीप खरीद घोटाला (1948) से मध्य के झारखंड मुक्ति मोर्चा मामला (1993) ,
आईपीएल घोटाला , कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला, विजय माल्या प्रकरण ( विभिन्न बैंकों के 9000 करोड़ रुपए के लोन डिफॉल्ट मामले में कई जांच शुरू होने के बाद अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित विजय माल्या फिलहाल ब्रिटेन में रह रहे हैं। ), पीएनबी घोटाला ( नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी ने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिए पंजाब नैशनल बैंक में 11,300 करोड़ रुपए का घोटाला कर डाला। देश के सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड के बाद दोनों फरार हैं।) , ऐसे लगभग सैकडों घोटाले ने हमें दुःखी किया है ।

“मिथिला” के 7 करोड़ आबादी आज पलायन , भुखमरी , गरीबी , बेरोजगारी , स्वास्थ्य शिक्षा की कुव्यवस्था एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित है । दुर्भाग्य यही है कि फिर से नेताजी आएंगे झूठे वादे करेंगे , लोकतंत्र की शपथ खाएंगे और हम उन्हें लोकतंत्र की प्रणाली से हम अपना ताकत उन्हें सौपेंगे और वो हमारे तागत , मत का दुरूपयोग कर हमारे भोले-भाले जनता को ट्रेन की सुविधा देकर सस्ता मजदूर बनाएंगे और हमारे इस पूजनीय धरती मिथिला को लेवर जोन घोषित करेंगे । हम नीति आयोग, केंद्र सरकार व राज्य सरकार के तरफ आशा भरी निगाहों से देखते – देखते अपने जीवनकाल को पूंजीवाद समर्थक सरकार के गुलाम बनाये रखेंगे ।

-विद्याभूषण राय (इस लेख में व्‍यक्‍त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

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