साँसद बीरेंद्र चौधरी हो सकते हैं जदयू में शामिल,झंझारपुर से JDU के टिकट पर लड़ेंगे चुनाव!

दिल्ली/मधुबनी/झंझारपुर । महागठबंधन के फाॅर्मूले की तर्ज पर जदयू वैसी सीटों पर चुनाव लड़ेगा, जहां पिछड़ा – अतिपिछड़ा जाति के मतदाताओं की बहुलता हैं .

मिथिलांचल की दरभंगा, मधुबनी और झंझारपुर में से एक सीट झंझारपुर जदयू को दी जायेगी. झंझारपुर सीट से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा जीतकर संसद और बिहार के सीएम की कुर्सी पर विराजमान हुए. वर्तमान में यहां से सांसद हैं भाजपा के बीरेन्द्र कुमार चौधरी. चर्चा है कि बीजेपी सांसद जेडीयू में जा सकते हैं, पहले भी वे जेडीयू में ही थे. पार्टी के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार साँसद बीरेंद्र कुमार चौधरी ही जदयू कोटे से एनडीए के उम्मीदवार होंगे…!

आपको बता दें कि पिछडा और अतिपिछड़ा जाति के नेताओं में शुमार बीरेंद्र कुमार चौधरी पूर्व में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफ़ी क़रीबी रहे हैं.राजद के दिग्गज मंगनीलाल मंडल को हराकर चुनाव जीते हुए सांसद बीरेंद्र कुमार चौधरी जब उन्हें प्रत्याशी के रूप में मिल रहे हैं तो जेडीयू इस मौके को भुनाना नहीं चाहेगी और वैसे भी जेडीयू के पास मिथिला में सांसद के रूप में पिछड़ा-अतिपिछड़ा चेहरे का अभाव है इसमें वीरेन्द्र कुमार चौधरी सबसे मजबूत है और एनडीए से श्री चौधरी का भी चुनाव लड़ना लगभग तय है.

झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत 6 विधानसभा सीटें आती हैं- खजौली, बाबूबरही, राजनगर, झंझारपुर, फूलपरास और लौकहा. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इन 6 सीटों में से 3 पर जेडीयू, 2 पर आरजेडी और एक सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की.

16वीं लोकसभा के लिए झंझारपुर सीट पर 2014 में हुए चुनाव में बाजी बीजेपी के हाथ लगी थी. बीजेपी के उम्मीदवार बीरेंद्र कुमार चौधरी ने जीत हासिल की. बीरेंद्र कुमार चौधरी को 335481 वोट मिले. जबकि आरजेडी के मंगनी लाल मंडल को 280073 वोट मिले. तीसरे नंबर पर रहे जेडीयू के उम्मीदवार देवेंद्र प्रसाद यादव. जिन्हें 183598 वोट मिले.

4 मई 1953 को जन्में बीरेंद्र कुमार चौधरी शिक्षित जनप्रतिनिधियों में गिने जाते हैं. उन्होंने एमए, एलएलबी किया हुआ है. संसद में उनकी उपस्थिति 97 फीसदी है. विभिन्न मुद्दों पर 38 बहसों में उन्होंने हिस्सा लिया. उन्होंने 33 सवाल पूछे. अपने सांसद निधि के 87 फीसदी फंड का उन्होंने इस्तेमाल किया. 51 लाख की संपत्ति की घोषणा उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में किया है. उद्योग मामलों की संसदीय समिति, सड़क-परिवहन और हाईवे-जहाजरानी मंत्रालय की सलाहकार समितियों के भी वे सदस्य रह चुके हैं.

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