भाजपा दरभंगा सीट छोड़ने को तैयार, संजय झा जदयू कोटे से एनडीए के उम्मीदवार होंगे !

न्यूज ऑफ मिथिला डेस्क । भाजपा, जदयू और लोजपा ने आपस में सीटों की संख्या तय कर ली है। यह घोषणा हो गई है कि भाजपा और जदयू 17-17 सीटों पर लड़ेंगे और लोजपा छह सीटों पर लड़ेगी। पर वो सीटें कौन सी होंगी, यह बाद के लिए छोड़ दिया गया है। बताया जा रहा है कि तीनों पार्टियों में सीटों की संख्या मोटे तौर पर पहले से तय है। जिस दिन अमित शाह ने कहा था कि भाजपा-जदयू बराबर सीटों पर लड़ेंगे उसी दिन संख्या तय हो गई थी पर उस दिन से सीटें चुनने पर विचार चल रहा है।

बताया जा रहा है कि नालंदा और मुंगेर सीट जदयू के खाते में जाएगी और खगड़िया सीट भाजपा को मिलेगी। नालंदा नीतीश कुमार का गृह जिला है। मुंगेर से जदयू के ललन सिंह और खगड़िया से भाजपा के सम्राट चौधरी चुनाव लड़ेंगे।

भाजपा पिछली बार 30 सीटों पर लड़ी थी और 22 पर जीती थी। इस बार वह अपनी जीती हुई पांच सीटें छोड़ रही है। उसकी जीती हुई बेगूसराय सीट लोजपा के खाते में जाएगी। दरभंगा सीट उसने जीती थी, जो जदयू के खाते में जाएगी। वहां से नीतीश कुमार के करीबी संजय झा को चुनाव लड़ना है। हालांकि भाजपा इसे अपनी पारंपरिक सीट मान रही है और छोड़ने में आनकानी कर रही है। इसकी बजाय वह मिथिलांचल में अपनी जीती झंझारपुर सीट छोड़ने पर राजी है।

जब संवाददाता ने दरभंगा से चुनाव लड़ने के संबंध में जदयू नेता संजय झा से पूछा तो श्री झा ने कहा कि दरभंगा के विकास के लिए लगातार काम कर रहा हूं. 2014 लोकसभा चुनाव में मैं जेडीयू के टिकट पर दरभंगा से चुनाव लड़ चुका हूं और पार्टी कहेगी तो आगामी लोकसभा चुनाव में दरभंगा से चुनाव लड़ूंगा।

पार्टी के विश्वसत सूत्र बताते हैं कि दरभंगा भाजपा में आपसी तालमेल नहीं है। जिला भाजपा के कार्यकर्ता दो भागों में बंट चुके हैं एक भाग नगर विधायक संजय सरावगी के ख़ेमा में तो दूसरा भाग बेनीपुर के पूर्व विधायक गोपाल जी ठाकुड़ के ख़ेमा में। इससे यह स्पस्ट है कि दरभंगा भाजपा और जदयू के अंदरखाने अंतर्कलह की संभावना से भी इंकार नही किया जा सकता।

संजय सरावगी की घनिष्ठता संजय झा के साथ यह किसी से भी छिपी हुई नही है। सरावगी समर्थक संजय झा की दावेदारी मानकर चल रहे हैं और अभी से ही सोशल साइट्स पर कंपैगन में लगे हुए हैं।
इधर गोपाल समर्थक गोपाल जी ठाकुड़ की दावेदारी मानकर चल रहे हैं और कंपैगन में जुटे हुए हैं। दूसरी और जदयू का दूसरा ख़ेमा सुनील चौधरी को स्थानीय और सबसे मजबूत दावेदार बताते हैं।
वर्तमान स्थिति में चुनाव प्रणाली आर्थिक रूप पर केंद्रित हो गयी है..? आर्थिक स्थिति में गोपाल ठाकुड़ संजय झा के सामने थोड़े पिछड़ते नज़र आ रहे हैं। यह भी एक वज़ह है कि दरभंगा लोकसभा सीट भाजपा छोड़ने को तैयार भी हैं..! संजय झा जदयू कोटे से एनडीए के उम्मीदवार हों सकते हैं। हालांकि जिला भाजपा के पदाधिकारीगण सोशल साइट्स पर पर अपना आक्रोश व्यक्त करते नज़र आ रही हैं।
लेकिन एक कहावत चरितार्थ है..होइहें वही जो राम रचि राखा!

असल में भाजपा ने यह तय किया है कि जिन सीटों पर वह पारंपरिक रूप से जीतती रही है उसे नहीं छोड़ेगी और जिन सीटों पर मोदी लहर में जीत गई उन्हें छोड़ देगी। सीतामढ़ी, झंझारपुर, मुजफ्फरपुर, महाराजगंज, नवादा आदि ऐसी ही सीटें हैं। दूसरी ओर जदयू की मांग कुछ ऐसी सीटों के लिए भी है, जो भाजपा की पारंपरिक सीट है। इन्हीं सीटों पर थोड़ी मुश्किल आ सकती है। हालांकि ज्यादा संभावना इस बात की है कि सीटों का फैसला भी आसानी से सुलझ जाएगा।

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